माहिष्मती से चित्तौड़ का भी जुड़ाव, बाहुबली फिल्म से भी मिलती है कहानी – ApnaRajasthan.Com

मध्यप्रदेश में नर्बदा नदी के तट पर बसे ऐतिहासिक नगर महेश्वर (पौराणिक माहिष्मती) का चित्तौडग़ढ़ (पौराणिक चित्रकूट) के इतिहास से भी गहरा नाता रहा है। महेश्वर पर मौर्यवंशीय राजाओं का शासन रहा, जिनमें से राजा मानमोरी, चित्रांगद मौर्य ने भी कुछ समय चित्तौड़ पर शासन किया था। सातवीं शताब्दी में राजा चित्रांगद मौर्य के शासन के कारण उनके नाम पर चित्तौड़ को उस समय चित्रकूट का नाम दिया गया था। इतिहास के इन तथ्यों का उल्लेख सन् 18 22 में चित्तौडग़ढ़ के समीप पुठोली के तालाब में मिले एक अभिलेख में मिलता है।
हाल ही में फिल्म बाहुबली-2 की सफलता के बाद माहिष्मती नगरी चर्चा में आ गई है। इतिहासकार डॉ. श्रीकृष्ण जुगनू के अनुसार चित्तौडग़ढ़ के पुठोली में सन् 18 22 में इतिहासकार कर्नल जेम्स टॉड को अभिलेख मिला था। इस अभिलेख में 713 ई के नर्मदा तट के तक्षक वंश का उल्लेख है। इसमें राजा महेश्वर को महाबली, बाहुबली बताया गया है। कर्नल टॉड ने इस शिलालेख का जिक्र अपनी किताब ‘एनाल्स एंड एंटीक्विटीज ऑफ राजस्थान’ में किया था। इसका अनुवाद डॉ. जुगनू ने भी उनकी किताब ‘मेवाड़ का प्रारंभिक इतिहास’ में दिया है। डॉ. जुगनू बताते हैं कि राजा महेश्वर इस वंश का इतना पराक्रमी राजा था कि उसके चर्चे अवंती से चित्रकूट तक थे। इसके साथ ही ये अभिलेख इस वंश के महेश्वर, भीम, भोज और मान राजाओं का विवरण भी देता है।
महाकवि जयशंकर प्रसाद ने भी किया जिक्र- हिन्दी साहित्य के युग प्रवर्तक महाकवि जयशंकर प्रसाद ने अपने नाटक चंद्रगुप्त मौर्य में लिखा कि मौर्य काल के परमार कभी उज्जयिनी की ओर तो कभी राजस्थान की ओर अपनी राजधानी बनाते थे। प्रसाद के अनुसार मौर्य कुल के राजा महेश्वर ने विक्रम संवत के लगभग 6 00 वर्ष बाद सहस्त्रार्जुन किर्तिक वीर्याजुन की महिष्मती को नर्मदा तट पर फिर से बसाया और उसका नाम महेश्वर रखा। अब बाहुबली फिल्म की कहानी भी चित्तौड़ के इतिहास से मिलती झूलती है।
ये भी हैं मेवाड़, माहिष्मती व बाहुबली में समानता
इन तीनों में शासक भगवान महेश यानि शिव के उपासक थे।

चित्तौड़ दुर्ग पर स्थित विजय स्तंभ शिल्पकारी का अद्भुत नमूना है। इसके निर्माण के लिए काम में ली गई तकनीक से मिलती-जुलती तकनीक बाहुबली फिल्म में भी देखने को मिलती है।

महाराणा प्रताप ने मुगलों से लोहा लेने व उनको मेवाड़ से खदेडऩे के लिए आदिवासी भील समुदाय के साथ जंगलों में समय बिताया था। कुछ इसी तरह का दृश्य बाहुबली फिल्म में भी फिल्माया गया है।

चित्रांगद ने बनाया चतरंग मोरी

मौर्य वंश के राजा मानमोरी ने मानसरोवर बनाने की परंपरा डाली थी। राजा चित्रांगद मौर्य ने भी दुर्ग पर चतरंग मोरी तालाब भी बनवाया था। बाद में इसी क्रम में चित्तौडग़ढ़ में कुकड़ेश्वर कुंड भी बनवाया गया। ये कुंड वर्तमान में दुर्ग पर रामपोल से राणा रतनसिंह महल की ओर जाने वाले मार्ग पर स्थित है।
चित्तौड़ में मिलते हैं माहिष्मती के प्रमाण
दो भागों में बनी बाहुबली फिल्म की पटकथा भले ही कल्पना का हिस्सा हो, लेकिन इसमें जिस माहिष्मती का जिक्र किया गया, वह पौराणिक समय में मौजूद थी। इस फिल्म ने माहिष्मती नगरी के इतिहास की ओर झांकने को प्रेरित किया है। पुठोली में मिले अभिलेख में महेश्वर व अन्य मौर्यवंशीय राजाओं के प्रमाण मिलते हैं।

-डॉ. श्रीकृष्ण जुगनू, इतिहासकार, उदयपुर ( Post By MyChittor.Com )

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *